Swad, Sehat aur Shakahar: Ayurveda se aaj tak

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₹299.00₹225.00

Short Descriptions

शुचि जी की ये पुस्तक स्वाद, सेहत और शाकाहारः आयुर्वेद से आज तक आपसे कहती है कि अपने घर की रसोई में झाँकिए। देखिये तो वहाँ क्या है? भारतीय रसोई में पाक-कला का खजाना है, पारंपरिक व्यंजनों को नया रंग दीजिये! अष्टाङ्गहृदयम् और चरक संहिता समेत अनेक ग्रंथों से सीधे सरल शब्दों में आयुर्वेद की जानकारी निकाल कर और आज के विज्ञान को साथ लेकर, इन दोनों के अनुसार अपने घर में उपलब्ध तमाम सामग्रियों से सेहत-भरा स्वादिष्ट भोजन कैसे बन सकता है, लेखिका ने इसकी विस्तृत जानकारी दी है।

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ISBN 13 978-1942426516
Book Language Hindi
Binding Paperback
Edition 2021
Authors Shuchi Agrawal  
Publishers Garuda Prakashan  
Category New Release Books   Offers   Culinary Books  
Weight 250.00 g
Dimension 14.00 x 2.00 x 22.00

Details

 

आज पूरी दुनिया 5000 वर्षों से भी अधिक पुराने भारतीय ग्रन्थ एवं आयुर्वेद के गुण गा रही है! शाकाहार आज पश्चिमी जगत में एक नया ट्रेंड बन रहा है। अमेरिका में हल्दी के कैप्सूल बिक रहे हैं। हमारे मसालों में छिपे सेहत के गुण, खाने का उचित समय, मौसमी सब्जी की उपयोगिता, दाल-चावल सम्पूर्ण प्रोटीन है, ये कुछ ऐसी बातें हैं, जिसे आज का विज्ञान भी मानता है।

शुचि जी की ये पुस्तक स्वाद, सेहत और शाकाहारः आयुर्वेद से आज तक आपसे कहती है कि अपने घर की रसोई में झाँकिए। देखिये तो वहाँ क्या है? भारतीय रसोई में पाक-कला का खजाना है, पारंपरिक व्यंजनों को नया रंग दीजिये! अष्टाङ्गहृदयम् और चरक संहिता समेत अनेक ग्रंथों से सीधे सरल शब्दों में आयुर्वेद की जानकारी निकाल कर और आज के विज्ञान को साथ लेकर, इन दोनों के अनुसार अपने घर में उपलब्ध तमाम सामग्रियों से सेहत-भरा स्वादिष्ट भोजन कैसे बन सकता है, लेखिका ने इसकी विस्तृत जानकारी दी है।

कच्चा खाना और पक्का खाना क्या है? खाने की तासीर क्या होती है? तेल कौन सा अच्छा होता है? आपके लिए किस प्रकार का भोजन ठीक है? मधुमेह के लिए कौन सा भोजन ठीक है? इस पुस्तक में ये सारी जानकारियाँ भी उपलब्ध हैं। रोज का खाना हो या फिर तीज त्यौहार का- स्वादिष्ट भोजन, अल्पाहार, मिठाइयाँ और पेय कैसे बनाएँ कि स्वाद के साथ सेहत भी बनी रहे, ऐसी तमाम जानकारियाँ समेटे है यह पुस्तक!

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क्या कहना !

इन विषयों पर मूल रूप में हिंदी में बहुत कम लिखा गया है । अनुवादित पुस्तकें पुस्तक की आत्मा नहीं होती । इस पुस्तक से काफी अपेक्षा है ।
Review by - चन्द्रकेतु ओझा, October 26, 2021
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