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Bharat Akhandan (भारत अखण्डन)

by   Sanjay Dixit (Author)  
by   Sanjay Dixit (Author)   (show less)
5.0 Ratings & 3 Reviews
Sold By:   Garuda Prakashan
₹499.00₹300.00

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ISBN 10 8885750035
ISBN 13 9798885750035
Book Language Hindi
Binding Paperback
Total Pages 380
Publishers Garuda Prakashan  
Category Non-Fiction   Jaipur Dialogues   Constitutional Law   Governance & Reforms   Indian Politics   Offers  
Weight 360.00 g
Dimension 14.00 x 22.00 x 3.00

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Reviews

A must read for all Indians

I must congratulate the Garuda publishers for publishing this gem in Hindi. It is important that we publish such books in different regional languages as well. All the places where Islamization is a problem should have this book in there own language. Telugu for Hyderabad and Bengali are must have translations for this book and other such extraordinary books. This book provides clarity to us about the challenges we have in unbreaking India and all Indians must work together to make it happen. Otherwise a complete anarchy and mayhem is not far.
Review by - Partha Sadhukhan, January 30, 2022

असाधारण पुस्तक।

कश्मीर विषय पर इतनी शोधपूर्ण लेखन विरल है। अगर आप विभाजन, कश्मीर, इस्लामिक बर्बरता का इतिहास का विस्तृत ज्ञान किसी एक पुस्तक के माध्यम से अर्जन करना चाहते हैं, तो इससे उत्कृष्ट विकल्प कोई हो ही नही सकता। अद्भुत कृति🙏🙏
Review by - শ্রী শুভময়, March 05, 2022

Thank you

Best Book
Review by - Bishnu Prasad Mohanta , March 26, 2022
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Product Details

भारत अखण्डन: अनुच्छेद 370 और नागरिकता संशोधन अधिनियम पर लिए गए निर्णय विभाजन के कारणों पर डॉ बी आर अम्बेडकर के विश्लेषण, तथा 'पृथक राष्ट्र' के इस्लामी मतवादीय सिद्धांत (जो सफल हुआ) - कि मुसलमान किसी गैर-मुसलमान शासन में अल्पसंख्यक की भाँति रहना कदापि स्वीकार नहीं करते - इन बातों का आधार लेते हुए आगे बढ़ती है। एक विद्वत्तापूर्ण विश्लेषण करते हुए श्री दीक्षित सीएए-विरोधी प्रदर्शनों और तदन्तर हुए दंगों की जड़ तक जाते हैं, जिनका प्रारूप वही था जिसे डॉ अम्बेडकर ने "राजनीति की गैंगस्टर पद्धति" की संज्ञा दी थी। यह पुस्तक 'शांतिप्रिय सूफियों', और यह कि मुसलमान भारत में इस कारण रुके क्योंकि उन्होंने 'पंथनिरपेक्ष भारत' की अवधारणा को चुना था, इन राजनैतिक लीपा-पोती से परिपूर्ण मिथकों को ध्वस्त करती है।

अनुच्छेद 370 के लिए श्री दीक्षित कश्मीर के इतिहास को तबसे खँगालते हैं, जब सुल्तान सिकंदर बुतशिकन (मूर्ति-भंजक) के अधीन कश्मीर से पहला बहिष्करण हुआ, और धरती के इस मनोहर स्वर्ग का इस्लामीकरण प्रारम्भ हुआ। 1989-90 का कश्मीरी हिन्दू बहिष्करण वास्तव में सातवाँ था।

यह पुस्तक उस इस्लामी रणनीति के अंतस में झाँकती है, जो निरन्तर जिहाद में विश्वास करती है, समाज को अर्ध-सत्य बता कर उन्हें दिग्भ्रमित करती है, ताकि उसका अंतिम लक्ष्य, जो कि दार-उल-इस्लाम बनाना है, प्राप्त किया जा सके।