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1857 Ka Swatantraya Samar

by   Vinayak Damodar Savarkar (Author)  
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Sold By:   Garuda Prakashan
₹400.00₹340.00

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वीर सावरकर रचित ‘1857 का स्वातंत्र्य समर’ विश्व की पहली इतिहास पुस्तक है, Read more below in the Description...

More Information

ISBN 13 978-9386300089
Book Language Hindi
Binding Paperback
Publishing Year 2017
Edition 1
Publishers Prabhat Prakashan  
Category History  
Weight 400.00 g
Dimension 14.00 x 2.00 x 22.00

Details

वीर सावरकर रचित ‘1857 का स्वातंत्र्य समर’ विश्व की पहली इतिहास पुस्तक है, जिसे प्रकाशन के पूर्व ही प्रतिबंधित होने का गौरव प्राप्तक हुआ। इस पुस्तक को ही यह गौरव प्राप्त है कि सन् 1909 में इसके प्रथम गुप्त संस्करण के प्रकाशन से 1947 में इसके प्रथम खुले प्रकाशन तक के अड़तीस वर्ष लंबे कालखंड में इसके कितने ही गुप्तर संस्करण अनेक भाषाओं में छपकर देश-विदेश में वितरित होते रहे। इस पुस्तक को छिपाकर भारत में लाना एक साहसपूर्ण क्रांति-कर्म बन गया। यह देशभक्त् क्रांतिकारियों की ‘गीता’ बन गई। इसकी अलभ्य प्रति को कहीं से खोज पाना सौभाग्य माना जाता था। इसकी एक-एक प्रति गुप्तं रूप से एक हाथ से दूसरे हाथ होती हुई अनेक अंतःकरणों में क्रांति की ज्वाला सुलगा जाती थी। पुस्तक के लेखन से पूर्व सावरकर के मन में अनेक प्रश्न थे-सन् 1857 का यथार्थ क्या है? क्या वह मात्र एक आकस्मिक सिपाही विद्रोह था ? क्या उसके नेता अपने तुच्छ स्वार्थों की रक्षा के लिए अलग-अलग इस विद्रोह में कूद पड़े थे, या वे किसी बड़े लक्ष्य की प्राप्तित के लिए एक सुनियोजित प्रयास था ? यदि हाँ, तो उस योजना में किस-किसका मस्तिष्क कार्य कर रहा था ? योजना का स्वरूप क्या था ? क्या सन् 1857 एक बीता हुआ बंद अध्याय है या भविष्य के लिए प्रेरणादायी जीवंत यात्रा ? भारत की भावी पीढ़ियों के लिए 1857 का संदेश क्या है ? आदि-आदि। और उन्हीं ज्वलंत प्रश्नोंज की परिणति है प्रस्तुत ग्रंथ-‘1857 का स्वातंत्र्य समर’! इसमें तत्कालीन संपूर्ण भारत की सामाजिक व राजनीतिक स्थिति के वर्णन के साथ ही हाहाकार मचा देनेवाले रण-तांडव का भी सिलसिलेवार, हृदय-द्रावक व सप्रमाण वर्णन है। प्रत्येक भारतीय हेतु पठनीय व संग्रहणीय, अलभ्य कृति !

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Good book

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Review by - Ajeet Singh, May 05, 2022
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