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Mahendra Pratap

महेंद्र प्रताप ने छठे दशक में काव्य रचना प्रारंभ की थी सातवें दशक में उनके दो कविता संग्रह 'स्फुलिंग' और 'ध्वान्त' प्रकाशित हुए थे और तभी काव्य चर्चा का विषय बन गए थे
महेंद्र प्रताप प्रारंभ से ही अपने परिवेश के प्रति बड़े सजग रहे हैं तेजी से बदलते देश और काल की शिनाख्त और साक्षी एक बड़ी हद तक इन कविताओं में मौजूद है इसे इतिहास को दर्ज कराने का उनका काव्यात्मक तरीका भी कह सकते हैं

बात तिब्बत की हो या बांग्लादेश की, दलित चेतना की हो या जाति आधारित राजनीति की, कश्मीर की हो या पंजाब की, इमरजेंसी की हो या 1984 के दंगों की, आतंकवाद की हो या अलगाववाद की, प्रादेशिक स्वायत्तता की हो या संघीय ढांचे से उसके तालमेल की, उनकी कविताएं इन सब से जुड़ती टकराती हैं और मूल्य विहिनता के भीतर से मूल्यों की तलाश का सपना लेती हैं यह सपना व्यक्ति का नहीं, पूरे भारतीय समाज का है व्यक्ति और समाज के तनाव के भीतर से यह उपजा है गहरी निराशा, हताशा, कटुता, मोहभंग के बावजूद महेंद्र प्रताप इस सपने को संजोने वाले कवि हैं

 

Dahan (दहन)

Dahan (दहन)

₹199.00

इस संग्रह में कविताएँ सात खंडों में रखी गई हैं। इन खंडों में उत्तरोत्तर विकसित होता हुआ एक संवेदनात्मक ग्राफ मौजूद है। इसमें एक के बाद एक संवेदनाएं, विचार और मनः स्थितियाँ अंकित हुई हैं। चौतरफा दम तोड़ते जाने के त्रासद-- एहसास गिरते चले जाने की अनुभूति के साथ लिपटे हुए हैं भीतरी बाहरी घुमड़न, उद्वेलन, छटपटाहट और संघर्ष के कई रूप जो इन्हें समाज और संस्कृति के ज्वलंत प्रश्नों के सामने खड़ा कर देते हैं। इन कविताओं में न तो रंग है न बहार; ना कोई छंद वा अलंकार; न रिमझिम, न फुहार; है तो बस एक मानवी...

sfuling( स्फुलिंग)

sfuling( स्फुलिंग)

₹199.00

यह “स्फुलिंग” मेरे अंतराल से तब तब टूटे हैं , जब जब कोई अग्निबाण,  मुझे बीचोंबीच, पार तक बेध गया है, और मैं ध्वान्त हुआ सा विवश होकर रह गया हूं । मेरी आंखें टूट टूट गई हैं, भाव बिंदु बिखर गए हैं ! अतः मेरी इन अभिव्यक्तियों की अर्थवत्ता यही है कि इनके शब्द शब्द को मैंने जिया है।  किंतु आज क्षण क्षण, कुछ और ही नया सा मेरे अंतरतम से उभर रहा है।  मैं पुनः आश्वस्त होना चाह रहा हूं !   इन स्फूर्तियों का भाव-स्तर मनु-मानस ही है।    वही मेरी...

Dhwant (ध्वान्त)

Dhwant (ध्वान्त)

₹199.00

"स्फुलिंग" के बाद अब “ध्वान्त”! विचित्र,किंतु सही है ! धुआं ही धुआं, घुटन, निराशा और टूटन! 'सकल परिवेश हमारा एक नकार है' --- धुआंधार है! तो भी चिनग है सही! "स्फुलिंग" की तरह “ध्वान्त” के विषय में भी यह प्रश्न उठने स्वाभाविक हैं। यहां उनकी मीमांसा अभीष्ट नहीं। तो भी इतना कह देना उचित है कि इनमें अधिकांश में परस्पर मूलतः कोई विरोध नहीं। हां, भेद अवश्य है। वस्तुतः यह सापेक्षिक प्रक्रियाएं हैं, एक दूसरे से संबंध एक प्रकार की अभिवृत्तियां, एक...

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Mahendra Pratap Collection -Pack of 3 ( SF,DH,DT)

Mahendra Pratap Collection -Pack of 3 ( SF,DH,DT)

₹597.00 ₹500.00

Mahendra Pratap's Poetry Collection:- SFULING DHWANT DAHAN